वाराणसी : ज्ञानवापी परिसर में एडवोकेट कमिश्नर के सर्वे के दौरान मिले शिवलिंग की पूजा-अर्चना की अनुमति नहीं मिलने पर ज्योतिष एवं द्वारका-शारदा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती नाराज हैं। पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत शनिवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ज्ञानवापी परिसर में पूजा-अर्चना के लिए केदारघाट स्थित श्री विद्यामठ से निकल पाते, इसके पहले ही प्रशासन ने उन्हें रोक लिया ओैर वहां फोर्स का पहरा बैठा दिया। यह देख स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अन्न जल त्याग कर मठ में ही अनशन पर बैठ गए। सूचना पर अफसर भी वहां पहुंच गये। अफसरों से बातचीत के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि जब तक ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग की पूजा नहीं कर लेंगे, तब तक अन्न जल ग्रहण नहीं करेंगे।
मीडियाकर्मियों से बातचीत में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि ज्ञानवापी के शिवलिंग की उन्हें पूजा करने दिया जाए या फिर प्रशासन पूजा-पाठ कर उन्हें अवगत कराए। अगर मामला कोर्ट में लंबित है तो क्या हमारे भगवान तब तक भूखे रहेंगे। उन्होंने कहा कि मुझे पूजा से मतलब है। पूजा के अधिकार मिलने से मतलब नहीं है। जो न्यायालय में दूसरे पक्षकार जा रहे हैं, वो पूजा का अधिकार मांग रहे हैं। न्यायालय में दो महीने बाद उनको अधिकार मिलेगा। हम कोई अधिकार नहीं मांग रहे हैं। हम भगवान की पूजा की मांग कर रहे हैं।उधर, प्रशासन ने किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया है। अनशन पर बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मनाने के लिए डीसीपी काशी जोन राजेश गौतम और एसीपी भेलूपुर प्रवीण कुमार ने काफी प्रयास किया, लेकिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद गुरु शंकराचार्य के आदेश का हवाला देकर पूजा करने की जिद पर अड़े हुए हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द ने कहा है कि हम मठ से विश्वेश्वर शिवलिंग की पूजा करने के लिए निकलेंगे।