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	<title>उत्तर प्रदेश &#8211; Kashi Jagran | काशी जागरण</title>
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	<description>Hindi News, Lifestyle &#38; Entertainment Articles</description>
	<lastBuildDate>Fri, 31 Jul 2026 07:58:20 +0000</lastBuildDate>
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		<title>क्या मेजबान होकर भी वर्ल्ड कप से बाहर रह जाएगी नामीबिया? नेपाल पर जीत के बाद फिर जगी 2027 World Cup की उम्मीद</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 31 Jul 2026 07:58:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वनडे विश्व कप 2027 अगले साल खेला जाना है, लेकिन उससे पहले इस बार क्वालिफिकेशन की जंग बेहद रोमांचक हो चुकी है। इस बार सबसे ज्यादा चर्चा नामीबिया को लेकर है, क्योंकि वह टूर्नामेंट की सह-मेजबान होने के बावजूद अब तक अपनी जगह पक्की नहीं कर सकी है। हाल ही में नेपाल पर जीत के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>वनडे विश्व कप 2027 अगले साल खेला जाना है, लेकिन उससे पहले इस बार क्वालिफिकेशन की जंग बेहद रोमांचक हो चुकी है। इस बार सबसे ज्यादा चर्चा नामीबिया को लेकर है, क्योंकि वह टूर्नामेंट की सह-मेजबान होने के बावजूद अब तक अपनी जगह पक्की नहीं कर सकी है। हाल ही में नेपाल पर जीत के बाद नामीबिया की उम्मीदों को नई ताकत मिली है। हालांकि टीम अभी भी अंक तालिका में टॉप-4 से बाहर है और फाइनल क्वालिफिकेशन के लिए उसे आगे शानदार प्रदर्शन करना होगा।<br />
नेपाल पर जीत से मजबूत हुई स्थिति<br />
आईसीसी मेंस क्रिकेट वर्ल्ड कप लीग-2 में नामीबिया ने नेपाल को हराकर दो महत्वपूर्ण अंक हासिल किए। इस जीत के बाद टीम 26 अंकों के साथ पांचवें स्थान पर पहुंच गई है। अब तक नामीबिया ने 31 मैच खेले हैं, जिनमें 12 जीत और 17 हार दर्ज की हैं। टीम के पास अभी भी शीर्ष-4 में पहुंचने का मौका बना हुआ है।<br />
लीग-2 में कैसी है अंक तालिका?<br />
फिलहाल लीग-2 में स्थिति कुछ इस प्रकार है—<br />
अमेरिका (USA) – पहले स्थान पर<br />
नीदरलैंड्स – दूसरे स्थान पर<br />
स्कॉटलैंड – तीसरे स्थान पर<br />
ओमान – चौथे स्थान पर<br />
नामीबिया – पांचवें स्थान पर<br />
लीग-2 के अंत में टॉप-4 टीमें सीधे वर्ल्ड कप क्वालिफायर में पहुंचेंगी, जबकि पांचवें से आठवें स्थान पर रहने वाली टीमों को क्वालिफायर प्लेऑफ खेलना होगा।<br />
मेजबान होने के बावजूद क्यों नहीं मिली सीधी एंट्री?<br />
ODI World Cup 2027 की मेजबानी दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया संयुक्त रूप से करेंगे।<br />
दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे को मेजबान होने के कारण सीधा स्थान मिला है।<br />
लेकिन नामीबिया आईसीसी का फुल मेंबर नहीं है, इसलिए उसे क्वालिफिकेशन प्रक्रिया से गुजरना होगा।<br />
यही वजह है कि मेजबान होने के बावजूद नामीबिया की जगह अभी सुनिश्चित नहीं है।<br />
क्या इतिहास बदल सकता है?<br />
अब तक वनडे विश्व कप के इतिहास में ऐसा नहीं हुआ कि मेजबान देश ही टूर्नामेंट में खेलने से चूक जाए।<br />
अगर नामीबिया क्वालिफाई नहीं कर पाती, तो यह विश्व कप इतिहास की एक अनोखी और पहली घटना होगी। हालांकि टीम के पास अभी भी मौका है। यदि वह अपने बाकी मुकाबलों में अच्छा प्रदर्शन करती है तो सीधे क्वालिफायर तक पहुंच सकती है। अन्यथा उसे प्लेऑफ के कठिन रास्ते से गुजरना होगा।</p>
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		<title>₹71 लीटर का एथेनॉल: ,फिर भी पेट्रोल में क्यों मिलाया जा रहा? सरकार ने बताया पूरा गणित</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 31 Jul 2026 07:56:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
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					<description><![CDATA[पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा लगातार बढ़ाई जा रही है, लेकिन सवाल उठ रहा है कि जब एथेनॉल की खरीद कीमत ही करीब 71 रुपये प्रति लीटर है, तो सरकार इसे पेट्रोल में मिलाने पर इतना जोर क्यों दे रही है? लोकसभा में भी यही सवाल उठा। इसके जवाब में केंद्र सरकार ने कहा कि &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा लगातार बढ़ाई जा रही है, लेकिन सवाल उठ रहा है कि जब एथेनॉल की खरीद कीमत ही करीब 71 रुपये प्रति लीटर है, तो सरकार इसे पेट्रोल में मिलाने पर इतना जोर क्यों दे रही है? लोकसभा में भी यही सवाल उठा। इसके जवाब में केंद्र सरकार ने कहा कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम का उद्देश्य तेल कंपनियों को सस्ता ईंधन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि देश को ऊर्जा के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाना, किसानों को बेहतर बाजार देना और विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना है।<br />
सवाल 1 : एथेनॉल आखिर कितने का खरीदा जा रहा है?<br />
सरकार के अनुसार, मौजूदा एथेनॉल आपूर्ति वर्ष (नवंबर 2025 से अक्टूबर 2026) में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां एथेनॉल करीब 71 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीद रही हैं। इस कीमत में जीएसटी और परिवहन खर्च भी शामिल है।<br />
इंडियन ऑयल : 71.18 रुपये प्रति लीटर<br />
हिंदुस्तान पेट्रोलियम : 71.10 रुपये प्रति लीटर<br />
भारत पेट्रोलियम : 71.21 रुपये प्रति लीटर<br />
सरकार ने बताया कि गन्ने के रस, बी-हैवी और सी-हैवी शीरे, क्षतिग्रस्त खाद्यान्न, एफसीआई के अतिरिक्त चावल और मक्का जैसे विभिन्न स्रोतों से तैयार एथेनॉल की औसत एक्स-डिस्टिलरी कीमत 66.61 रुपये प्रति लीटर है, जिसमें जीएसटी और परिवहन लागत शामिल नहीं है।<br />
सवाल 2 : जब एथेनॉल सस्ता नहीं है, तो इसे पेट्रोल में क्यों मिलाया जा रहा है?<br />
सरकार का कहना है कि इस योजना को केवल खरीद कीमत के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। एथेनॉल मिश्रण का उद्देश्य दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों को साधना है। सरकार के मुताबिक इससे -कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटती है। अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर कम होता है। देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होती है। किसानों को अपनी फसलों के लिए अतिरिक्त बाजार मिलता है। वाहनों से होने वाले प्रदूषण में कमी आती है। सरकार ने स्पष्ट किया कि एथेनॉल खरीद की व्यवस्था तेल कंपनियों का मुनाफा बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने और उत्पादकों को उचित मूल्य देने के लिए बनाई गई है।<br />
सवाल 3 : पश्चिम एशिया संकट के दौरान क्या फायदा मिला?<br />
सरकार ने संसद में कहा कि हाल के पश्चिम एशिया संकट के दौरान जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 70 से 80 प्रतिशत तक उछाल आया, तब भी भारत में पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी लगभग 7 से 8 प्रतिशत तक सीमित रही। सरकार का कहना है कि जब भारतीय कच्चे तेल की कीमत करीब 135 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, तब बाजार के हिसाब से पेट्रोल लगभग 125 रुपये प्रति लीटर बिक सकता था। इसके बावजूद दिल्ली में उपभोक्ताओं को 94.77 रुपये प्रति लीटर की दर से पेट्रोल उपलब्ध कराया गया। सरकार ने इसका एक कारण घरेलू स्तर पर उपलब्ध एथेनॉल को भी बताया। हालांकि इस अवधि में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को पेट्रोल पर औसतन लगभग 11 रुपये प्रति लीटर का अंडर-रिकवरी नुकसान हुआ, जिसकी कुल राशि करीब 21,300 करोड़ रुपये रही।<br />
सवाल 4 : क्या E20 पेट्रोल से गाड़ी के इंजन को नुकसान होता है?<br />
सरकार ने कहा कि अधिक एथेनॉल मिश्रण लागू करने से पहले ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), वाहन निर्माता कंपनियों, तेल विपणन कंपनियों और अन्य विशेषज्ञ संस्थाओं ने व्यापक परीक्षण किए थे। सरकार के अनुसार, देश में 23 करोड़ से अधिक वाहन उच्च एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग कर रहे हैं। इनमें 20 करोड़ से अधिक दोपहिया और लगभग 3 करोड़ पेट्रोल कारें शामिल हैं। अब तक एथेनॉल मिश्रण के कारण बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने का कोई प्रमाणित मामला सामने नहीं आया है। वाहन निर्माता कंपनियां E20 ईंधन का उपयोग करने वाले वाहनों की वारंटी भी जारी रखे हुए हैं।<br />
सवाल 5 : किसानों को इससे क्या फायदा होगा?<br />
सरकार का मानना है कि एथेनॉल की मांग बढ़ने से गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों के लिए नया बाजार तैयार होता है। इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलने की संभावना रहती है।<br />
सवाल 6 : सरकार का बड़ा लक्ष्य क्या है?<br />
सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रण केवल ईंधन नीति नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण और विदेशी तेल पर निर्भरता कम करने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। इसलिए इस योजना का मूल्यांकन केवल इस आधार पर नहीं किया जाना चाहिए कि एथेनॉल पेट्रोल से सस्ता है या महंगा।<br />
एक नजर में<br />
-एथेनॉल खरीद कीमत: करीब 71 रुपये प्रति लीटर<br />
-उद्देश्य: ऊर्जा सुरक्षा और आयातित तेल पर निर्भरता कम करना<br />
-किसानों को लाभ: कृषि उत्पादों की मांग बढ़ने की संभावना<br />
-पर्यावरण: वाहनों से उत्सर्जन कम करने में मदद का दावा<br />
-वाहन: 23 करोड़ से अधिक वाहन उच्च एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग कर रहे हैं<br />
-सरकार का संदेश: यह योजना मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर लागू की जा रही है।</p>
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		<item>
		<title>Mahanadi flood: Odisha में मध्यम बाढ़ की आशंका, 5 जिलों में &#8216;हाई अलर्ट&#8217; जारी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 31 Jul 2026 07:48:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[महानदी नदी में ‘‘मध्यम’’ बाढ़ की आशंका को देखते हुए ओडिशा सरकार ने राज्य के घनी आबादी वाले तटीय क्षेत्रों में ‘हाई अलर्ट’ जारी कर रखा है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने बृहस्पतिवार को बताया कि कटक के पास मुंडाली बैराज पर महानदी में लगभग नौ लाख &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>महानदी नदी में ‘‘मध्यम’’ बाढ़ की आशंका को देखते हुए ओडिशा सरकार ने राज्य के घनी आबादी वाले तटीय क्षेत्रों में ‘हाई अलर्ट’ जारी कर रखा है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने बृहस्पतिवार को बताया कि कटक के पास मुंडाली बैराज पर महानदी में लगभग नौ लाख क्यूसेक पानी बह रहा है, जिससे खुर्दा, कटक, पुरी, जगतसिंहपुर और केंद्रपाड़ा जिलों में बाढ़ आने की आशंका है। पुजारी ने कहा, ‘‘कटक के आठगढ़ और बादंबा क्षेत्रों में बाढ़ का पानी घुसने की खबर मिली है। जिला कलेक्टर को लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और बचाव दलों की तैनाती करने के निर्देश दिए गए हैं।’’ जल संसाधन विभाग के मुख्य इंजीनियर दिलीप कुमार राउत ने कहा कि अगले 36 घंटे बेहद महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि महानदी में बाढ़ का जलप्रवाह अपने चरम पर पहुंचने की आशंका है। उन्होंने बताया कि महानदी नदी में आठ लाख क्यूसेक से अधिक जलप्रवाह को ‘‘मध्यम बाढ़’’ माना जाता है। पुजारी ने बताया कि बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है। राउत ने कहा कि खुर्दा, पुरी, केंद्रपाड़ा और जगतसिंहपुर जिलों में महानदी और उसकी सहायक नदियों के तटबंधों की सुरक्षा के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में कर्मियों की तैनाती की गई है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मुंडाली बैराज पहले भी 10 से 12 लाख क्यूसेक तक के जलप्रवाह को संभाल चुका है। अधिकारियों के अनुसार, बृहस्पतिवार शाम तक मुंडाली पर जलप्रवाह नौ लाख क्यूसेक से अधिक होने की संभावना है। इससे महानदी और उसकी सहायक नदियों लूना, करंडिया, चित्रोत्पला, पैका, सालिया, देवी, कंदला, कुआखाई, कुशभद्रा, दया और भार्गवी में बाढ़ का पानी आ सकता है। राउत ने कहा, ‘‘हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी तटबंध में टूट-फूट न हो और मानव जीवन की कोई हानि न हो। निचले इलाकों में जलभराव चिंता का विषय है। जिन अधिकारियों को पहले बाढ़ प्रबंधन का अनुभव है, उन्हें संवेदनशील जिलों में तैनात किया गया है।’’ विशेष राहत आयुक्त राजेश प्रभाकर पाटी ने महानदी डेल्टा क्षेत्र के जिलों के कलेक्टर को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं और संबंधित क्षेत्रों में सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। पुजारी ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बाढ़ प्रभावित उत्तरी जिलों का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद बताया कि हालिया बाढ़ से राज्य के 30 में से 20 जिलों के सात लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि लगभग 1.90 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाकर 520 राहत शिविरों में रखा गया है। पाटी ने बताया कि विभिन्न जिलों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), ओडिशा आपदा त्वरित प्रतिक्रिया बल और अग्निशमन सेवाओं की कुल 123 बचाव टीम तैनात की गई हैं। इस बीच दिल्ली में मौजूद ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि उन्होंने सभी जिला कलेक्टर को हाई अलर्ट पर रहने और प्रभावित लोगों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं सभी लोगों से अपील करता हूं कि बाढ़ की स्थिति को लेकर घबराएं नहीं। नागरिकों की सुरक्षा और संरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।</p>
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		<item>
		<title>Allahabad High Court का फैसला, प्रशासनिक देरी के आधार पर छूट नहीं मांग सकते सरकारी विभाग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 31 Jul 2026 07:46:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि सरकारी विभाग मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम के तहत अपील दायर करने में हुई देरी को माफ कराने के लिए केवल नौकरशाही प्रक्रियाओं, फाइलों की आवाजाही या प्रशासनिक विलंब का हवाला नहीं दे सकते। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून की नजर में सरकार और निजी पक्षकार समान स्तर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि सरकारी विभाग मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम के तहत अपील दायर करने में हुई देरी को माफ कराने के लिए केवल नौकरशाही प्रक्रियाओं, फाइलों की आवाजाही या प्रशासनिक विलंब का हवाला नहीं दे सकते। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून की नजर में सरकार और निजी पक्षकार समान स्तर पर हैं तथा विलंब माफी के लिए सरकारी विभागों को ठोस और वास्तविक कारण बताने होंगे। 13 जुलाई को सुरक्षित रखा गया यह फैसला 29 जुलाई को सुनाया गया, जिसे बृहस्पतिवार को उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड किया गया। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह टिप्पणी रेल मंत्रालय की उस विशेष अपील को खारिज करते हुए की, जो लखनऊ की वाणिज्यिक अदालत के एक आदेश के खिलाफ दायर की गई थी। खंडपीठ ने वाणिज्यिक अदालत के उस निर्णय को सही ठहराया, जिसमें मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 34 के तहत आपत्तियां दाखिल करने में हुई 28 दिन की देरी को माफ करने से इनकार कर दिया गया था। मामला मेसर्स गैलेंट इस्पात लिमिटेड और रेल मंत्रालय के बीच रेलवे साइडिंग के लिए आवंटित भूमि के पट्टा किराये से संबंधित विवाद का था। दिसंबर 2023 में एकल मध्यस्थ ने कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए रेलवे को पट्टा किराये में संशोधन करने तथा लगभग 1.79 करोड़ रुपये आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने का निर्देश दिया था। रेल मंत्रालय ने इस मध्यस्थीय निर्णय को वाणिज्यिक अदालत में चुनौती दी, लेकिन उसकी याचिका निर्धारित समय-सीमा के बाद दाखिल की गई। इस कारण अदालत ने देरी माफ करने का अनुरोध अस्वीकार कर दिया, जिसके बाद रेल मंत्रालय ने उच्च न्यायालय का रुख किया। गैलेंट इस्पात लिमिटेड की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा ने दलील दी कि रेल मंत्रालय देरी के लिए कोई ठोस कारण प्रस्तुत नहीं कर सका, इसलिए उसे राहत नहीं दी जा सकती। उच्च न्यायालय ने अपील खारिज करते हुए कहा कि न्यायालयों का लगातार यह दृष्टिकोण रहा है कि विलंब माफी ‘‘अपवाद है, नियम नहीं।’’ अदालत ने कहा कि सरकारी विभागों को देरी के लिए वास्तविक, ठोस और पर्याप्त कारण प्रस्तुत करने होंगे। वे केवल प्रशासनिक चूक, प्रक्रियागत विलंब या विभागों के बीच फाइलों की आवाजाही का हवाला देकर राहत की अपेक्षा नहीं कर सकते।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>अगले 5 दिन सावधान! IMD ने उत्तर भारत के कई राज्यों में भारी बारिश और बिजली गिरने का जारी किया अलर्ट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 31 Jul 2026 07:01:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[अगर आप दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल या जम्मू-कश्मीर में हैं, तो अगले कुछ दिन मौसम को हल्के में न लें। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 30 जुलाई से 4 अगस्त तक उत्तर भारत के कई राज्यों में भारी बारिश, आंधी-तूफान, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अगर आप दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल या जम्मू-कश्मीर में हैं, तो अगले कुछ दिन मौसम को हल्के में न लें। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 30 जुलाई से 4 अगस्त तक उत्तर भारत के कई राज्यों में भारी बारिश, आंधी-तूफान, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब में इस अवधि के दौरान व्यापक बारिश होने की संभावना है। इसके साथ तेज हवाएं, गरज-चमक और बिजली गिरने की भी आशंका जताई गई है।<br />
इसी तरह हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर-लद्दाख-गिलगित-बाल्टिस्तान-मुजफ्फराबाद क्षेत्र में भी कई स्थानों पर तेज बारिश का अनुमान है।<br />
कहां होगी सबसे ज्यादा बारिश?<br />
आईएमडी के पूर्वानुमान के अनुसार—<br />
30 जुलाई से 4 अगस्त के बीच हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के कुछ इलाकों में भारी बारिश हो सकती है।<br />
पंजाब और हिमाचल प्रदेश में 1 से 4 अगस्त तक कई स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है।<br />
30 और 31 जुलाई को पंजाब और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है।<br />
मध्य भारत में भी बारिश का असर<br />
आईएमडी ने पश्चिमी मध्य प्रदेश और विदर्भ में अतिवृष्टि की संभावना जताई है, जबकि पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में बहुत भारी बारिश हो सकती है। इन क्षेत्रों में भी बिजली गिरने और तेज हवाओं के साथ आंधी-तूफान आने की आशंका है। मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और प्रशासन द्वारा जारी सलाह का पालन करने की अपील की है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>12 साल में भारतीय रेलवे ने दीं 5.56 लाख नौकरियां, संसद में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने साझा किए बड़े आंकड़े</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 30 Jul 2026 10:18:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारतीय रेलवे में रोजगार को लेकर केंद्र सरकार ने संसद में बड़ा आंकड़ा पेश किया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में बताया कि वर्ष 2014 से जून 2026 तक भारतीय रेलवे में कुल 5.56 लाख लोगों की नियुक्ति की गई है। इन भर्तियों में विभिन्न श्रेणियों के पद शामिल हैं। मंत्री &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>भारतीय रेलवे में रोजगार को लेकर केंद्र सरकार ने संसद में बड़ा आंकड़ा पेश किया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में बताया कि वर्ष 2014 से जून 2026 तक भारतीय रेलवे में कुल 5.56 लाख लोगों की नियुक्ति की गई है। इन भर्तियों में विभिन्न श्रेणियों के पद शामिल हैं। मंत्री के अनुसार, इस अवधि में दक्षिण रेलवे में 50,485 कर्मचारियों की भर्ती हुई। रेल मंत्री ने पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल से तुलना करते हुए कहा कि 2004-05 से 2013-14 के बीच यूपीए सरकार के दौरान रेलवे में 4.11 लाख नियुक्तियां हुई थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि रेलवे में भर्ती प्रक्रिया प्रत्येक जोन की आवश्यकता और उपलब्ध पदों के आधार पर संचालित की जाती है।<br />
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर<br />
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि रेलवे भर्ती परीक्षाएं बड़े स्तर पर आयोजित की जाती हैं और पूरी प्रक्रिया निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुरूप पारदर्शी तरीके से संपन्न कराई जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि बदलती तकनीक और परिचालन जरूरतों के अनुसार समय-समय पर अलग-अलग पदों के लिए भर्ती निकाली जाती है।<br />
एक टीटीई को अधिकतम पांच एसी कोच की जिम्मेदारी<br />
लोकसभा में नांदेड़ से कांग्रेस सांसद रवींद्र वसंतराव चव्हाण ने टीटीई पर कार्यभार को लेकर प्रश्न उठाया था। इसके जवाब में रेल मंत्री ने बताया कि नए दिशा-निर्देशों के अनुसार एक टीटीई को अधिकतम पांच एसी कोच या तीन चेयर कार अथवा तीन स्लीपर कोच की जिम्मेदारी दी जाती है।<br />
उन्होंने कहा कि किसी ट्रेन में टीटीई की संख्या वहां मौजूद कोचों की संख्या और श्रेणी के अनुसार तय की जाती है, ताकि टिकट जांच के साथ यात्रियों को बेहतर सहायता भी मिल सके। साथ ही जोनल रेलवे को समय-समय पर मानव संसाधनों के प्रभावी उपयोग के लिए प्रशासनिक निर्देश भी जारी किए जाते हैं।<br />
कैंसिल टिकट से होने वाली आय का अलग रिकॉर्ड नहीं<br />
राज्यसभा में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में रेल मंत्री ने बताया कि भारतीय रेलवे कैंसिल और वेटिंग टिकट से होने वाली आय का क्षेत्रवार रिकॉर्ड नहीं रखता।<br />
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस और अमृत भारत एक्सप्रेस के टिकट रद्द करने के नियम अन्य ट्रेनों से अलग हैं।</p>
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		<title>सारनाथ को मिली वैश्विक पहचान, यूनेस्को ने 25 नए स्थलों को विश्व धरोहर सूची में किया शामिल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 30 Jul 2026 10:16:51 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[यूनेस्को (UNESCO) ने अपनी विश्व धरोहर सूची (World Heritage List) का विस्तार करते हुए 25 नए स्थलों को शामिल किया है। इस सूची में उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ, ईरान का आलमूत महल और संबंधित किला तथा जॉर्डन का अकाबा समुद्री संरक्षित क्षेत्र भी शामिल हैं। इन स्थलों को विश्व धरोहर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>यूनेस्को (UNESCO) ने अपनी विश्व धरोहर सूची (World Heritage List) का विस्तार करते हुए 25 नए स्थलों को शामिल किया है। इस सूची में उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ, ईरान का आलमूत महल और संबंधित किला तथा जॉर्डन का अकाबा समुद्री संरक्षित क्षेत्र भी शामिल हैं। इन स्थलों को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने का निर्णय दक्षिण कोरिया के बुसान में 19 से 29 जुलाई तक आयोजित विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में लिया गया। सारनाथ को 25 जुलाई को आधिकारिक रूप से इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल किया गया।<br />
तीन अफ्रीकी देशों के लिए भी ऐतिहासिक रहा यह सत्र<br />
यूनेस्को के बयान के अनुसार, इस बार का सत्र कोमोरोस, साओ टोमे एवं प्रिंसिपे और दक्षिण सूडान के लिए ऐतिहासिक रहा। पहली बार इन तीनों देशों के किसी स्थल को विश्व धरोहर सूची में स्थान मिला है। संगठन ने इसे विश्व धरोहर सूची को अधिक संतुलित और प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।<br />
छह स्थलों को संकटग्रस्त विश्व धरोहर सूची में भी किया शामिल<br />
विश्व धरोहर समिति ने छह स्थलों को संकटग्रस्त विश्व धरोहरों की सूची में भी शामिल किया। यूनेस्को के अनुसार, इन स्थलों के असाधारण महत्व और उनके संरक्षण की आवश्यकता को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।<br />
इन नए स्थलों को भी मिली विश्व धरोहर का दर्जा<br />
इस वर्ष सूची में शामिल अन्य प्रमुख स्थलों में जापान की प्राचीन राजधानियां असुका और फुजिवारा, उज्बेकिस्तान का ताशकंद मॉडर्निस्ट आर्किटेक्चर, साओ टोमे एवं प्रिंसिपे का &#8216;रोकास&#8217;, तथा यूनान के माउंट ओलंपस का बड़ा हिस्सा शामिल हैं।<br />
अब 173 देशों के 1,273 स्थल सूची में शामिल<br />
यूनेस्को ने 28 जुलाई को जारी अपने बयान में बताया कि 25 नई प्रविष्टियों के बाद अब विश्व धरोहर सूची में शामिल स्थलों की कुल संख्या 1,273 हो गई है, जो 173 देशों में स्थित हैं।<br />
इन नए स्थलों को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च मान्यता मिलने के साथ-साथ संरक्षण के लिए वैश्विक सहयोग का लाभ भी मिलेगा।<br />
19 सांस्कृतिक, 5 प्राकृतिक और 1 मिश्रित स्थल को मिली जगह<br />
समिति ने आपसी सहमति से जिन 25 नए स्थलों को सूची में शामिल किया, उनमें 19 सांस्कृतिक, 5 प्राकृतिक और 1 मिश्रित स्थल शामिल हैं। इसके अलावा पहले से सूचीबद्ध दो स्थलों के दायरे के विस्तार को भी मंजूरी दी गई, जिनमें दक्षिण कोरिया का गेटबोल (कोरियाई ज्वारीय मैदान-चरण 2) भी शामिल है।<br />
वियना का ऐतिहासिक केंद्र खतरे वाली सूची से बाहर<br />
विश्व धरोहर समिति ने ऑस्ट्रिया के वियना के ऐतिहासिक केंद्र को संकटग्रस्त विश्व धरोहरों की सूची से हटाने का भी निर्णय लिया। समिति का अगला सत्र वर्ष 2027 में तुर्किये के इस्तांबुल में आयोजित किया जाएगा।</p>
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		<title>सावन के पहले दिन काशी विश्वनाथ धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, CM योगी ने किया बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 30 Jul 2026 10:15:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सावन के पावन महीने की शुरुआत गुरुवार से हो गई और पहले ही दिन भगवान शिव की नगरी काशी में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। श्री काशी विश्वनाथ धाम में तड़के से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे शिवभक्तों ने बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>सावन के पावन महीने की शुरुआत गुरुवार से हो गई और पहले ही दिन भगवान शिव की नगरी काशी में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। श्री काशी विश्वनाथ धाम में तड़के से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे शिवभक्तों ने बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की। इसी दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने दो दिवसीय वाराणसी दौरे के दूसरे दिन श्री काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उन्होंने बाबा विश्वनाथ का विधि-विधान से जलाभिषेक और पूजा-अर्चना की। इसके बाद मुख्यमंत्री ने श्री काल भैरव मंदिर पहुंचकर दर्शन किए और आरती में भी सहभागिता की।<br />
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम<br />
सावन के पहले दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए श्री काशी विश्वनाथ धाम और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए। मंदिर परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और भीड़ को व्यवस्थित रखने के लिए विशेष रूट प्लान लागू किया गया। श्रावण मास के दौरान आम श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से मंदिर प्रशासन ने वीआईपी और प्रोटोकॉल दर्शन पर रोक लगाने का निर्णय भी लागू किया है, ताकि दर्शन व्यवस्था सुचारु बनी रहे।<br />
श्रावण मास में काशी का विशेष धार्मिक महत्व<br />
हिंदू मान्यताओं के अनुसार श्रावण मास भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस महीने में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और शिव पूजन का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक की गई पूजा से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। हर वर्ष श्रावण मास में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु काशी विश्वनाथ धाम पहुंचते हैं। इस बार भी पहले दिन से ही मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पूजा-अर्चना के साथ धार्मिक आयोजनों का शुभारंभ हुआ। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से निर्धारित मार्ग और सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।</p>
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		<title>सावन के पहले दिन बरेली पहुंचेंगे चीफ सेक्रेटरी और डीजीपी, अलर्ट पर बरेली मंडल के अधिकारी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 30 Jul 2026 10:15:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल और डीजीपी (पुलिस महानिदेशक ) राजीव कृष्णा, सावन के पहले दिन, कल-30 जुलाई को बरेली पहुंच रहे हैं। शासन के शीर्ष अधिकारियों का दौरा प्रस्तावित होते ही बरेली मंडल के अधिकारी अलर्ट हो गए हैं। विशेषकर कांवड़ यात्रा को लेकर&#8230;। तैयारियां युद्ध स्तर पर तेज कर दी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल और डीजीपी (पुलिस महानिदेशक ) राजीव कृष्णा, सावन के पहले दिन, कल-30 जुलाई को बरेली पहुंच रहे हैं। शासन के शीर्ष अधिकारियों का दौरा प्रस्तावित होते ही बरेली मंडल के अधिकारी अलर्ट हो गए हैं। विशेषकर कांवड़ यात्रा को लेकर&#8230;। तैयारियां युद्ध स्तर पर तेज कर दी गई हैं। सावन के शुभारंभ पर चीफ सेक्रेटरी और डीजीपी का बरेली दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चीफ सेक्रेटरी और डीजीपी के बरेली आने की सूचना मिलते ही बुधवार को पुलिस और प्रशासनिक हल्के में हलचल तेज हो गई है। मंडल के चार जनपद, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर और बदायूं यानी चारों जिलों के अधिकारियों को अलर्ट कर दिया गया है। कानून व्यवस्था से लेकर कांवड़ की तैयारियों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं तक, सब कुछ व्यवस्थित करने का निर्देश दिया गया है।<br />
गुरुवार को चीफ सेक्रेटरी शासन की योजनाओं की स्थिति परखेंगे। चारों जनपदों में कल्याणकारी योजनाओं और शासन की प्राथमिकताओं वाले कार्यों की जमीनी स्थिति जानेंगे। दूसरी तरफ डीजीपी बरेली क्षेत्र में कानून व्यवस्था की नब्ज टटोलेंगे। माना जा रहा है कि इस दौरे पर सीधे सीएम कार्यालय से नजर रहेगी। बरेली मंडल के अधिकारियों के साथ बैठक भी होगी। इसमें कुछ बड़े एक्शन भी देखने को मिल सकते हैं।<br />
कांवड़ यात्रा पर नजर<br />
गुरुवार को सावन का पावन माह शुरू हो रहा है। इसी के साथ कांवड़ यात्राओं का शुभारंभ हो जाएगा। बरेली परिक्षेत्र में लाखों कांवड़िये गंगा जल लेने निकलते हैं। बरेली बैठक के दौरान सबसे प्रमुख बिंदु कांवड़ यात्रा ही रहेगी। शासन-प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता यही है कि कावंड़ यात्राएं शांतिपूर्वक और गरिमामय वातावरण में संपन्न हों। इसलिए बरेली मंडल के चारों जिलों में कांवड़ मार्गों की क्या स्थिति हैं। वहां सुरक्षा व्यवस्था के क्या इंतजाम किए गए हैं। शासन ने जो दिशा-निर्देश जारी किए थे-उनका कितना पालन किया गया। कौन से सेंसटिव मार्ग हैं और कहां-कितनी फोर्स तैनात रहेगी। सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन की क्या स्थिति है? सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े तमाम पहलुओं पर मंथन होगा। ढिलाई मिलने पर कार्रवाई तय है।<br />
महिला सुरक्षा पर विशेष जोर<br />
महिला सुरक्षा का मुद्दा सीएम की प्राथमिकता में शामिल है। वह अक्सर अपनी सभाओं में महिला सुरक्षा के मुद्दे को सर्वोच्च रखते हैं। ऐसे में डीजीपी बरेली क्षेत्र में महिला अपराध से जुड़े मामलों की टोह लेंगे। ऐसे मामलों में कार्रवाई की स्थिति भी जानेंगे और महिला अपराध के विषय में पुलिस की तत्परता, लापरवाही-दोनों जानेंगे। महिलाओं से जुड़े अपराधों में कार्रवाई की स्थिति और पेंडेंसी पर भी बात होगी।\<br />
गड्ढा मुक्त सड़कें<br />
कांवड़ के दौरान शहर के मुख्य मार्गों की क्या स्थिति है? गड्ढे तो नहीं हैं? विशेषकर सातों नाथ मंदिरों को जाने वाले रास्तों की हालत भी देखी जा सकती है। चीफ सेक्रेटरी इस मामले में जानकारी ले सकते हैं। इसके अलावा यातायात को लेकर रूट डायवर्जन प्लान पहले से तैयार किया गया जा चुका है।<br />
कानून व्यवस्था पर सख्ती<br />
डीजीपी बरेली पुलिस लाइन सभागार में बरेली मंडल के चारों जिलों के कप्तानों के साथ बैठक करेंगे। इस दौरान जिलों में कानून व्यवस्था की स्थिति परखेंगे। कानून व्यवस्था को लेकर सीएम बेहद सख्त हैं और संभव है कि जहां भी रत्ती भर ढिलाई मिली तो कार्रवाई तय है।<br />
स्मार्ट सिटी का निरीक्षण<br />
स्मार्ट सिटी बरेली में विकास कार्यों की जायजा भी लिया जाएगा। चीफस सेक्रेटरी निर्माण कार्यों का निरीक्षण भी कर सकते हैं। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अंतर्गत बरेली में सड़कों का चौड़ीकरण चल रहा है। सौंदर्यीकरण और आधुनिक बस टर्मिनल निर्माण कार्य जारी है। संभव है कि चीफ सेक्रेटरी इनमें से किसी प्रोजेक्ट का स्थलीय निरीक्षण करने पहुंच जाएं।<br />
सक्रिय हो गए अधिकारी<br />
चीफ सेक्रेटरी और डीजीपी के दौरे की भनक के बरेली मंडल के शीर्ष अधिकारियों से लेकर नीचे तक, सब अलर्ट हो गए हैं। कांवड़ यात्रा में सुरक्षा व्यवस्था से लेकर ट्रैफिक बंदोवस्त तक का भौतिक सत्यापन किया जाने लगा है। बुधवार को बरेली मंडल के शीर्ष अधिकारी बरेली मंडल में फील्ड पर सक्रिय रहे। चारों जिलों में यही स्थिति रही है। अधिकारी खुद उन सभी बिंदुओं को रख रहे हैं, जो शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में हैं।</p>
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		<title>CM योगी की गाजीपुर को 692 करोड़ की सौगात, यहां पढ़ें पल-पल के अपडेट सबसे पहले</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 30 Jul 2026 10:14:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[उत्तर प्रदेश में हर दिन राजनीति, प्रशासन, अपराध, शिक्षा, रोजगार, मौसम, सड़क हादसों, धार्मिक आयोजनों और सरकारी फैसलों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घटनाएं सामने आती हैं। UP Breaking Live में आपको प्रदेशभर की हर छोटी-बड़ी खबर का पल-पल का अपडेट एक ही जगह मिलेगा। राजधानी लखनऊ से लेकर नोएडा, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, मेरठ, आगरा, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>उत्तर प्रदेश में हर दिन राजनीति, प्रशासन, अपराध, शिक्षा, रोजगार, मौसम, सड़क हादसों, धार्मिक आयोजनों और सरकारी फैसलों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घटनाएं सामने आती हैं। UP Breaking Live में आपको प्रदेशभर की हर छोटी-बड़ी खबर का पल-पल का अपडेट एक ही जगह मिलेगा। राजधानी लखनऊ से लेकर नोएडा, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, मेरठ, आगरा, अयोध्या, बरेली, मुरादाबाद और प्रदेश के सभी जिलों की प्रमुख खबरों पर हमारी लगातार नजर रहेगी।</p>
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