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	<title>व्यापार &#8211; Kashi Jagran | काशी जागरण</title>
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	<description>Hindi News, Lifestyle &#38; Entertainment Articles</description>
	<lastBuildDate>Fri, 31 Jul 2026 07:56:35 +0000</lastBuildDate>
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		<title>₹71 लीटर का एथेनॉल: ,फिर भी पेट्रोल में क्यों मिलाया जा रहा? सरकार ने बताया पूरा गणित</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 31 Jul 2026 07:56:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा लगातार बढ़ाई जा रही है, लेकिन सवाल उठ रहा है कि जब एथेनॉल की खरीद कीमत ही करीब 71 रुपये प्रति लीटर है, तो सरकार इसे पेट्रोल में मिलाने पर इतना जोर क्यों दे रही है? लोकसभा में भी यही सवाल उठा। इसके जवाब में केंद्र सरकार ने कहा कि &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा लगातार बढ़ाई जा रही है, लेकिन सवाल उठ रहा है कि जब एथेनॉल की खरीद कीमत ही करीब 71 रुपये प्रति लीटर है, तो सरकार इसे पेट्रोल में मिलाने पर इतना जोर क्यों दे रही है? लोकसभा में भी यही सवाल उठा। इसके जवाब में केंद्र सरकार ने कहा कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम का उद्देश्य तेल कंपनियों को सस्ता ईंधन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि देश को ऊर्जा के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाना, किसानों को बेहतर बाजार देना और विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना है।<br />
सवाल 1 : एथेनॉल आखिर कितने का खरीदा जा रहा है?<br />
सरकार के अनुसार, मौजूदा एथेनॉल आपूर्ति वर्ष (नवंबर 2025 से अक्टूबर 2026) में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां एथेनॉल करीब 71 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीद रही हैं। इस कीमत में जीएसटी और परिवहन खर्च भी शामिल है।<br />
इंडियन ऑयल : 71.18 रुपये प्रति लीटर<br />
हिंदुस्तान पेट्रोलियम : 71.10 रुपये प्रति लीटर<br />
भारत पेट्रोलियम : 71.21 रुपये प्रति लीटर<br />
सरकार ने बताया कि गन्ने के रस, बी-हैवी और सी-हैवी शीरे, क्षतिग्रस्त खाद्यान्न, एफसीआई के अतिरिक्त चावल और मक्का जैसे विभिन्न स्रोतों से तैयार एथेनॉल की औसत एक्स-डिस्टिलरी कीमत 66.61 रुपये प्रति लीटर है, जिसमें जीएसटी और परिवहन लागत शामिल नहीं है।<br />
सवाल 2 : जब एथेनॉल सस्ता नहीं है, तो इसे पेट्रोल में क्यों मिलाया जा रहा है?<br />
सरकार का कहना है कि इस योजना को केवल खरीद कीमत के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। एथेनॉल मिश्रण का उद्देश्य दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों को साधना है। सरकार के मुताबिक इससे -कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटती है। अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर कम होता है। देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होती है। किसानों को अपनी फसलों के लिए अतिरिक्त बाजार मिलता है। वाहनों से होने वाले प्रदूषण में कमी आती है। सरकार ने स्पष्ट किया कि एथेनॉल खरीद की व्यवस्था तेल कंपनियों का मुनाफा बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने और उत्पादकों को उचित मूल्य देने के लिए बनाई गई है।<br />
सवाल 3 : पश्चिम एशिया संकट के दौरान क्या फायदा मिला?<br />
सरकार ने संसद में कहा कि हाल के पश्चिम एशिया संकट के दौरान जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 70 से 80 प्रतिशत तक उछाल आया, तब भी भारत में पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी लगभग 7 से 8 प्रतिशत तक सीमित रही। सरकार का कहना है कि जब भारतीय कच्चे तेल की कीमत करीब 135 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, तब बाजार के हिसाब से पेट्रोल लगभग 125 रुपये प्रति लीटर बिक सकता था। इसके बावजूद दिल्ली में उपभोक्ताओं को 94.77 रुपये प्रति लीटर की दर से पेट्रोल उपलब्ध कराया गया। सरकार ने इसका एक कारण घरेलू स्तर पर उपलब्ध एथेनॉल को भी बताया। हालांकि इस अवधि में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को पेट्रोल पर औसतन लगभग 11 रुपये प्रति लीटर का अंडर-रिकवरी नुकसान हुआ, जिसकी कुल राशि करीब 21,300 करोड़ रुपये रही।<br />
सवाल 4 : क्या E20 पेट्रोल से गाड़ी के इंजन को नुकसान होता है?<br />
सरकार ने कहा कि अधिक एथेनॉल मिश्रण लागू करने से पहले ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), वाहन निर्माता कंपनियों, तेल विपणन कंपनियों और अन्य विशेषज्ञ संस्थाओं ने व्यापक परीक्षण किए थे। सरकार के अनुसार, देश में 23 करोड़ से अधिक वाहन उच्च एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग कर रहे हैं। इनमें 20 करोड़ से अधिक दोपहिया और लगभग 3 करोड़ पेट्रोल कारें शामिल हैं। अब तक एथेनॉल मिश्रण के कारण बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने का कोई प्रमाणित मामला सामने नहीं आया है। वाहन निर्माता कंपनियां E20 ईंधन का उपयोग करने वाले वाहनों की वारंटी भी जारी रखे हुए हैं।<br />
सवाल 5 : किसानों को इससे क्या फायदा होगा?<br />
सरकार का मानना है कि एथेनॉल की मांग बढ़ने से गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों के लिए नया बाजार तैयार होता है। इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलने की संभावना रहती है।<br />
सवाल 6 : सरकार का बड़ा लक्ष्य क्या है?<br />
सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रण केवल ईंधन नीति नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण और विदेशी तेल पर निर्भरता कम करने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। इसलिए इस योजना का मूल्यांकन केवल इस आधार पर नहीं किया जाना चाहिए कि एथेनॉल पेट्रोल से सस्ता है या महंगा।<br />
एक नजर में<br />
-एथेनॉल खरीद कीमत: करीब 71 रुपये प्रति लीटर<br />
-उद्देश्य: ऊर्जा सुरक्षा और आयातित तेल पर निर्भरता कम करना<br />
-किसानों को लाभ: कृषि उत्पादों की मांग बढ़ने की संभावना<br />
-पर्यावरण: वाहनों से उत्सर्जन कम करने में मदद का दावा<br />
-वाहन: 23 करोड़ से अधिक वाहन उच्च एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग कर रहे हैं<br />
-सरकार का संदेश: यह योजना मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर लागू की जा रही है।</p>
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		<title>Gold Price में ₹1,000 की तेजी, दिल्ली सर्राफा बाजार में Silver Price ₹600 टूटी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 31 Jul 2026 07:52:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में बृहस्पतिवार को सोने की कीमतें 1,000 रुपये बढ़कर 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम हो गईं। इसकी वजह वैश्विक बाजार में मजबूत रुझानों के बीच आभूषण और फुटकर विक्रेताओं की ओर से ताजा लिवाली है। इससे पिछले सत्र में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 1,47,000 रुपये प्रति &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में बृहस्पतिवार को सोने की कीमतें 1,000 रुपये बढ़कर 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम हो गईं। इसकी वजह वैश्विक बाजार में मजबूत रुझानों के बीच आभूषण और फुटकर विक्रेताओं की ओर से ताजा लिवाली है। इससे पिछले सत्र में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 1,47,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुई थी। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, हालांकि, चांदी की कीमत 600 रुपये टूटकर 2,24,700 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी कर सहित) रह गई, जबकि बुधवार को यह 2,25,300 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। कारोबारियों ने कहा कि आभूषण विक्रेताओं और स्टॉक रखने वालों की मांग बढ़ने से घरेलू सोने की कीमतें थोड़ी बढ़ीं; हालांकि, रुपया मजबूत होने से कीमतों में और बढ़ोतरी सीमित रही। एचडीएफसी सिक्योरिटीज में वरिष्ठ विश्लेषक-जिंस सौमिल गांधी ने कहा, ‘‘फेडरल रिजर्व की हालिया नीतिगत घोषणा के बाद डॉलर में गिरावट के बीच इस कीमती धातु की मांग बढ़ने से बृहस्पतिवार को सोने की कीमतों में तेजी आई।’’ उन्होंने कहा कि पिछले सत्र में लगभग एक प्रतिशत की गिरावट के बाद डॉलर इंडेक्स 101 के स्तर के आसपास बना रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में, हाजिर सोना मामूली बढ़त के साथ 4,071.55 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था और चांदी एक प्रतिशत बढ़कर 58.25 डॉलर प्रति औंस हो गई। कोटक नियो (पहले कोटक सिक्योरिटीज) में जिंस शोध विभाग की एवीपी, कायनात चैनवाला ने कहा, ‘‘हाजिर सोना 4,060 डॉलर प्रति औंस और चांदी 57.5 डॉलर प्रति औंस के आसपास स्थिर बनी हुई है, क्योंकि बाजार में शामिल लोग दिन के उत्तरार्द्ध में आने वाले अमेरिकी व्यक्तिगत खपत खर्च मुद्रास्फीति और बेरोजगारी दावे के आंकड़ों से पहले फेडरल रिजर्व के यथास्थिति बनाए रखने के फैसले को समझ रहे हैं।’’ इस बीच, अप्रैल-जून में भारत में सोने की मांग सालाना आधार पर छह प्रतिशत घटकर 131.4 टन रह गई। विश्व स्वर्ण परिषद की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल इसी अवधि में कुल मांग 139.7 टन की थी। इसके अलावा, अप्रैल-जून तिमाही में सोने की वैश्विक मांग सालाना आधार पर 1,269 टन पर स्थिर रही। पिछले साल इसी तिमाही में सोने की कुल मांग 1,268.6 टन थी।</p>
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		<title>Allahabad High Court का फैसला, प्रशासनिक देरी के आधार पर छूट नहीं मांग सकते सरकारी विभाग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 31 Jul 2026 07:46:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि सरकारी विभाग मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम के तहत अपील दायर करने में हुई देरी को माफ कराने के लिए केवल नौकरशाही प्रक्रियाओं, फाइलों की आवाजाही या प्रशासनिक विलंब का हवाला नहीं दे सकते। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून की नजर में सरकार और निजी पक्षकार समान स्तर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि सरकारी विभाग मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम के तहत अपील दायर करने में हुई देरी को माफ कराने के लिए केवल नौकरशाही प्रक्रियाओं, फाइलों की आवाजाही या प्रशासनिक विलंब का हवाला नहीं दे सकते। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून की नजर में सरकार और निजी पक्षकार समान स्तर पर हैं तथा विलंब माफी के लिए सरकारी विभागों को ठोस और वास्तविक कारण बताने होंगे। 13 जुलाई को सुरक्षित रखा गया यह फैसला 29 जुलाई को सुनाया गया, जिसे बृहस्पतिवार को उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड किया गया। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह टिप्पणी रेल मंत्रालय की उस विशेष अपील को खारिज करते हुए की, जो लखनऊ की वाणिज्यिक अदालत के एक आदेश के खिलाफ दायर की गई थी। खंडपीठ ने वाणिज्यिक अदालत के उस निर्णय को सही ठहराया, जिसमें मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 34 के तहत आपत्तियां दाखिल करने में हुई 28 दिन की देरी को माफ करने से इनकार कर दिया गया था। मामला मेसर्स गैलेंट इस्पात लिमिटेड और रेल मंत्रालय के बीच रेलवे साइडिंग के लिए आवंटित भूमि के पट्टा किराये से संबंधित विवाद का था। दिसंबर 2023 में एकल मध्यस्थ ने कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए रेलवे को पट्टा किराये में संशोधन करने तथा लगभग 1.79 करोड़ रुपये आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने का निर्देश दिया था। रेल मंत्रालय ने इस मध्यस्थीय निर्णय को वाणिज्यिक अदालत में चुनौती दी, लेकिन उसकी याचिका निर्धारित समय-सीमा के बाद दाखिल की गई। इस कारण अदालत ने देरी माफ करने का अनुरोध अस्वीकार कर दिया, जिसके बाद रेल मंत्रालय ने उच्च न्यायालय का रुख किया। गैलेंट इस्पात लिमिटेड की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा ने दलील दी कि रेल मंत्रालय देरी के लिए कोई ठोस कारण प्रस्तुत नहीं कर सका, इसलिए उसे राहत नहीं दी जा सकती। उच्च न्यायालय ने अपील खारिज करते हुए कहा कि न्यायालयों का लगातार यह दृष्टिकोण रहा है कि विलंब माफी ‘‘अपवाद है, नियम नहीं।’’ अदालत ने कहा कि सरकारी विभागों को देरी के लिए वास्तविक, ठोस और पर्याप्त कारण प्रस्तुत करने होंगे। वे केवल प्रशासनिक चूक, प्रक्रियागत विलंब या विभागों के बीच फाइलों की आवाजाही का हवाला देकर राहत की अपेक्षा नहीं कर सकते।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>Pan Card नहीं कर रहा है काम, कहीं ये बंद तो नहीं हो गया? कैसे करें पता</title>
		<link>https://kashijagran.com/pan-card-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%af%e0%a5%87/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 07 Jun 2025 09:42:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
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					<description><![CDATA[आधार कार्ड की तरह पैन कार्ड भी आज एक जरूरी दस्तावेज बन गया है। इसके बिना पैसों से जुड़ी स्कीम या कोई अन्य काम कर पाना मुश्किल है। लेकिन तब क्या होगा, जब पैन कार्ड ही बंद हो जाए, ऐसे में जहां भी पैन कार्ड लिंक होगा। उस योजना का लाभ पाने में परेशानी आएगी। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="752" height="357" src="https://bharatkitasveer.com/wp-content/uploads/2025/06/kjk.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy"></p>
<p>आधार कार्ड की तरह पैन कार्ड भी आज एक जरूरी दस्तावेज बन गया है। इसके बिना पैसों से जुड़ी स्कीम या कोई अन्य काम कर पाना मुश्किल है। लेकिन तब क्या होगा, जब पैन कार्ड ही बंद हो जाए, ऐसे में जहां भी पैन कार्ड लिंक होगा। उस योजना का लाभ पाने में परेशानी आएगी।</p>
<p>इसलिए ये आर्टिकल आपके लिए बड़े काम का होने वाला है। आज हम घर बैठे ही ये चेक कर सकते हैं कि पैन कार्ड बंद हो गया या नहीं। आइए इनके स्टेप्स भी देख लेते हैं।</p>
<p><strong>स्टेप बाय स्टेप प्रोसेस</strong><br />पैन कार्ड से जुड़ा स्टेटस चेक करने के लिए आपको नीचे दिए स्टेप्स को फॉलो करना होगा।</p>
<p>स्टेप 1- सबसे पहले आपको इनकम टैक्स की वेबसाइट पर जाना होगा।</p>
<p>स्टेप 2- अब यहां आपको Quick Link का ऑप्शन दिखाई देगा, इस पर क्लिक करें।</p>
<p>स्टेप 3- यहां दिए गए सभी ऑप्शन में से Verify Pan Status पर क्लिक करें।</p>
<p>स्टेप 4- इसके बाद एक नया पेज खुलेगा, इस पर मांगी गई जानकारी ध्यान से भरें।</p>
<p>जैसे आपको यहां पैन नंबर, पैन पर लिखा गया नाम, जन्मतिथि और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर इत्यादि भरना होगा।</p>
<p>स्टेप 5- अब Continue वाले ऑप्शन पर क्लिक करें।</p>
<p>स्टेप 6- फिर आपको पैन कार्ड से लिंक मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी प्राप्त होगा।</p>
<p>स्टेप 7- ओटीपी दर्ज कर Validate वाले ऑप्शन पर क्लिक करें।</p>
<p>स्टेप 8- अगर आपका पैन कार्ड बंद नहीं हुआ है, तो स्क्रीन पर ये लिखा आएगा-</p>
<p>इस तरह से आप पैन कार्ड स्टेटस घर बैठे ही मोबाइल फोन पर पता कर पाएंगे। पैन कार्ड पर दिए गए नंबरों का मतलब होता है, ये नंबर आपकी निजी जानकारी से जुड़े हुए होते हैं।</p>
<p><strong>क्या है पैन नंबर का मतलब?</strong><br />पैन नंबर आपके द्वारा दी गई निजी जानकारी पर आधारित होता है। पैन नंबर के पहले तीन नंबर अंग्रेजी अक्षर होते हैं। ये AAA अक्षर से लेकर ZZZ के बीच कुछ हो सकता है।</p>
<p>चौथा अक्षर कार्ड होल्डर की टैक्स कैटेगरी को दर्शाता है। मसलन अगर कोई व्यक्ति कार्डहोल्डर है, तो उसे P अक्षर से दर्शाया जाता है। इसके अलावा कंपनी को C अक्षर से शो किया जाता है।</p>
<p>पांचवा नंबर आपके सरनेम का पहला अक्षर लिखा गया होता है। जैसे अगर सरनेम शर्मा (Sharma) है, तो 5 वां नंबर S लिखा जाएगा। बाद के नंबर इनकम टैक्स विभाग द्वारा तय किए जाते हैं।</p>
<p>इस तरह से अलग-अलग व्यक्ति के लिए अलग-अलग पैन कार्ड डिजाइन किए जाते हैं।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बीत गए IndusInd Bank के बुरे दिन! RBI के बयान से शेयरों में 4% की तेजी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 07 Jun 2025 09:42:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
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					<description><![CDATA[डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में हुए घोटाले के बाद से इंडसइंड बैंक के शेयर सुर्खियों में है, आज आरबीआई के एक बयान से इनमें एक्शन देखने को मिला है। ये बैंक शेयर आज 6 फीसदी से ज्यादा चढ़ गए। दरअसल, आरबीआई गवर्नर ने बैंक की हालिया परेशानियों, जिसमें ऑडिट संबंधी खामियां शामिल हैं, पर टिप्पणी की। भारतीय &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="760" height="350" src="https://bharatkitasveer.com/wp-content/uploads/2025/06/h.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy"></p>
<p>डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में हुए घोटाले के बाद से इंडसइंड बैंक के शेयर सुर्खियों में है, आज आरबीआई के एक बयान से इनमें एक्शन देखने को मिला है। ये बैंक शेयर आज 6 फीसदी से ज्यादा चढ़ गए। दरअसल, आरबीआई गवर्नर ने बैंक की हालिया परेशानियों, जिसमें ऑडिट संबंधी खामियां शामिल हैं, पर टिप्पणी की।</p>
<p>भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने मुंबई में मॉनेटरी पॉलिसी के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “इंडसइंड बैंक ने अकाउंटिंग प्रैक्टिस में सुधार के लिए पर्याप्त कदम उठाए हैं। कुल मिलाकर बैंक अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।” इंडसइंड बैंक के शेयर फिलहाल पौने 3 फीसदी की बढ़त के साथ 824 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहे हैं।</p>
<p><strong>‘जरूरत पड़ी तो देंगे दखल’</strong><br />आरबीआई गवर्नर ने कहा कि इंडसइंड के एमडी और सीईओ ने इस्तीफा दे दिया है, यह अच्छा होना है। इंडसइंड में हुई धोखाधड़ी को लेकर कानून अपना काम करेगा। अगर हमें दखल देना पड़ा तो हम पीछे नहीं हटेंगे।<br />वहीं, आरबीआई के डिप्टी गवर्नर जे स्वामीनाथन ने कहा, “इंडसइंड के मामले में, यह मुद्दा बहुत जल्द सुलझ जाना चाहिए। हम बैंकिंग प्रणाली की निगरानी करते रहेंगे।”</p>
<p>उधर गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने कहा, “आमतौर पर हम अलग-अलग बैंकों पर टिप्पणी नहीं करते हैं। हमें इंडसइंड बैंक में धोखाधड़ी को लेकर अटकलें नहीं लगानी चाहिए।”</p>
<p><strong>गड़बड़ी के बाद से चर्चा में बैंक</strong><br />बता दें कि इंडसइंड बैंक इस समय मुश्किल दौर से गुजर रहा है और फॉरेंसिक ऑडिट चल रहा है। इस साल मार्च में बैंक ने डेरिवेटिव अकाउंटिंग में चूक के कारण अपनी नेटवर्थ को 2,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने के बारे में बताया था। इसके बाद बैंक में और भी अकाउंटिंग अनियमितताएं उजागर हुईं और यह एक नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी सहित एक नई नेतृत्व टीम की नियुक्ति की प्रक्रिया में है।</p>
<p>पिछले महीने, बाजार नियामक सेबी ने कथित तौर पर इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोप में इंडसइंड बैंक के पूर्व सीईओ, डिप्टी सीईओ और तीन अन्य को अगले आदेश तक सिक्योरिटी मार्केट में ट्रेड करने पर रोक लगा दी थी।</p>
<p>(डिस्क्लेमर: यहां शेयरों को लेकर दी गई जानकारी निवेश की राय नहीं है. चूंकि, स्टॉक मार्केट में निवेश बाजर जोखिमों के अधीन है इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें.)</p>
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		<title>ITR: इनकम टैक्स return filing से पहले समझिए TDS के बारे में हर जानकारी</title>
		<link>https://kashijagran.com/itr-%e0%a4%87%e0%a4%a8%e0%a4%95%e0%a4%ae-%e0%a4%9f%e0%a5%88%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b8-return-filing-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%9d%e0%a4%bf/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 07 Jun 2025 09:42:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
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					<description><![CDATA[अगर आप इनकम टैक्स रिटर्न फाइल (ITR Filing 2025) करने जा रहे हैं तो आपके लिए टैक्स डिडक्शन एट सोर्स यानी टीडीएस (TDS) को जानना जरूरी है। इस आर्टिकल में हम आपको बता रहे हैं कि टीडीएस क्या होता है, यह किन मामलों में लागू होता है, टीडीएस फाइलिंग के नियम क्या हैं, नियम का &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="749" height="394" src="https://bharatkitasveer.com/wp-content/uploads/2025/06/Screenshot-2025-06-07-121548.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy"></p>
<p>अगर आप इनकम टैक्स रिटर्न फाइल (ITR Filing 2025) करने जा रहे हैं तो आपके लिए टैक्स डिडक्शन एट सोर्स यानी टीडीएस (TDS) को जानना जरूरी है। इस आर्टिकल में हम आपको बता रहे हैं कि टीडीएस क्या होता है, यह किन मामलों में लागू होता है, टीडीएस फाइलिंग के नियम क्या हैं, नियम का पालन नहीं करने पर क्या होता है।</p>
<p><strong>क्या होता है TDS</strong><br />जब कोई व्यक्ति, संस्था या कंपनी किसी को पेमेंट करती है तो टैक्स काटकर पेमेंट करने का नियम है। यह पेमेंट सैलरी, किराया, कमीशन आदि के रूप में हो सकता है। हालांकि एक निश्चित रकम से अधिक पेमेंट करने पर ही TDS काटने का प्रावधान है। टीडीएस काटने वाले व्यक्ति या संस्था को टैक्स की रकम सरकार के पास जमा करनी पड़ती है। टैक्सपेयर जब इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करता है तो उस समय टीडीएस को एडजस्ट किया जाता है।</p>
<p><strong>किन मामलों में काटा जाता है TDS</strong><br />सैलरी (धारा 192), ब्याज (धारा 194A), किराया (धारा 194I), प्रोफेशनल फीस (धारा 194J), कमीशन या ब्रोकरेज (धारा 194H), प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री (धारा 194 IA) या डिविडेंड (धारा 194) जैसे ट्रांजैक्शन में TDS काटने का प्रावधान है। टीडीएस काटने वाला टैक्सपेयर को अगर सैलरी देता है तो उसे Form 16 देना होगा। नॉन-सैलेरी पेमेंट के लिए फॉर्म 16A दिया जाता है।</p>
<p><strong>अगर कटा है आपका TDS या TCS तो अभी गलती से भी मत फाइल करिएगा ITR</strong></p>
<p><strong>कहां देख सकते हैं टीडीएस की डिटेल</strong><br />जिस टैक्स पेयर का टीडीएस काटा जाता है वह उसकी डिटेल फॉर्म 26AS या AIS में देख सकता है। इनकम टैक्स रिटर्न फाइल (ITR filing) करते समय टैक्सपेयर की जो टैक्स लायबिलिटी बनती है उसमें वह टीडीएस को एडजस्ट कर सकता है।</p>
<p><strong>हर तिमाही टीडीएस जमा करना जरूरी</strong><br />टीडीएस काटने वाले को हर तिमाही टीडीएस रिटर्न फाइल करना जरूरी है। इसके लिए फॉर्म 24Q, 26Q आदि का इस्तेमाल किया जाता है। अगर टीडीएस काटने वाले ने हर तिमाही टैक्स की रकम सरकार के पास जमा नहीं की या देर से जमा की, तो उस पर धारा 234E के तहत जुर्माना लग सकता है।</p>
<p><strong>कितना काटा जाता है टीडीएस</strong><br />टीडीएस काटने की दर क्या होगी यह पेमेंट टाइप और जिसे पेमेंट दिया जा रहा है उस पर निर्भर करता है। यह व्यक्ति और फर्म के लिए अलग-अलग है। उदाहरण के लिए अगर कंपनी आपको सैलरी देती है तो आपकी सालाना इनकम के ब्रैकेट के हिसाब से टैक्स काटा जाएगा। जिस व्यक्ति का टीडीएस काटा जाना है अगर उसने अपना पैन नहीं दिया तो 20% या उससे अधिक दर से टीडीएस कटेगा।</p>
<p><strong>ITR फाइलिंग के लिए खुल गए ये दो फॉर्म, जानिए आपके लिए कौन सा है फॉर्म सही?</strong></p>
<p><strong>निल डिडक्शन का भी प्रावधान</strong><br />टीडीएस में निल डिडक्शन सर्टिफिकेट का भी प्रावधान है। जिस व्यक्ति का टीडीएस काटा गया है अगर उसकी वास्तविक टैक्स लायबिलिटी टीडीएस की तुलना में कम है, तो वह धारा 197 के तहत कम टीडीएस या निल टीडीएस के लिए आवेदन कर सकता है। अगर आप पर कोई टैक्स लायबिलिटी नहीं बनती है, फिर भी टीडीएस कटा है तो आप उसका रिफंड क्लेम कर सकते हैं।</p>
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		<title>OECD ने भी माना भारतीय अर्थव्यवस्था का लोहा, ग्लोबल इकोनॉमी को लेकर जताई से चिंता</title>
		<link>https://kashijagran.com/oecd-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%85%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 07 Jun 2025 09:42:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
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					<description><![CDATA[विकसित देशों के संगठन Organisation for Economic Co Operation and Development (OECD) ने एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में विश्व अर्थव्यवस्था और इंडियन इकोनॉमी को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कही गई हैं। ओईसीडी ने जहां वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता जताई है, वहीं भारत की इकोनॉमी को लेकर उत्साह जताया है। Oecd के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="759" height="428" src="https://bharatkitasveer.com/wp-content/uploads/2025/06/Screenshot-2025-06-07-121955.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://bharatkitasveer.com/wp-content/uploads/2025/06/Screenshot-2025-06-07-121955.png 759w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2025/06/Screenshot-2025-06-07-121955-390x220.png 390w" sizes="(max-width: 759px) 100vw, 759px"></p>
<p>विकसित देशों के संगठन Organisation for Economic Co Operation and Development (OECD) ने एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में विश्व अर्थव्यवस्था और इंडियन इकोनॉमी को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कही गई हैं। ओईसीडी ने जहां वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता जताई है, वहीं भारत की इकोनॉमी को लेकर उत्साह जताया है।</p>
<p>Oecd के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की फास्टेस्ट फास्टेस्ट ग्रोइंग इकोनॉमी बनेगी। वही विश्व अर्थव्यवस्था की ग्रोथ में अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा लगाया गया टैरिफ रुकावट बन सकता है। टैरिफ लगाने से इसका नेगेटिव प्रभाव अमेरिका की इकोनॉमी पर पड़ेगा।<br />भारत की जीडीपी 6.3 फीसदी से ग्रो कर सकती है। इंडियन इकोनॉमी को Private Consumption का सपोर्ट मिल रहा है। इससे लोगों की इनकम बढ़ेगी और लोअर टैक्स इनकम वाले मिडिल क्लास को सपोर्ट मिलेगा।</p>
<p>इसके साथ ही उन्होंने बताया की यूस द्वारा लगाया गया टैरिफ निवेश पर प्रभाव कर सकता है। खासकर ऐसे सेक्टर जो निर्यात पर निर्भर है। इनमें केमिकल, टेक्सटाइल और इलेक्ट्रॉनिक शामिल हैं।</p>
<p>इससे पहले, भारतीय रिजर्व बैंक ने भी चालू वित्त वर्ष में इंडियल जीडीपी में 6.5 फीसदी विकास दर का अनुमान लगाया था। केंद्रीय सांख्यिकी मंत्रालय भी वित्त वर्ष 2025-26 में 6.5 फीसदी विकास दर का अनुमान जता चुका है।</p>
<p><strong>वित्त वर्ष 2026 में कितनी बढ़ेगी विश्व अर्थव्यवस्था?</strong><br />वैश्विक जीडीपी साल 2025 में 2.9 फीसदी रहने का अनुमान है, जो साल 2024 की 3.3% की ग्रोथ रेट से कम है।Oecd का कहना है कि वैश्विक ग्रोथ आउटलुक और खराब हो सकता है अगर संरक्षणवाद बढ़ता है। क्योंकि इससे महंगाई और बढ़ेगी, सप्लाईचेन बाधित होगी और पूंजी बाजार हिल जाएंगे।</p>
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		<title>तगड़ी तेजी के बाद YES Bank के शेयरों में जोरदार गिरावट</title>
		<link>https://kashijagran.com/%e0%a4%a4%e0%a4%97%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a5%80-%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a6-yes-bank-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b6%e0%a5%87%e0%a4%af%e0%a4%b0/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 03 Jun 2025 08:07:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
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					<description><![CDATA[यस बैंक के शेयरों में तेजी के बाद फिर से बिकवाली हावी हो गई है। आज यह बैंक स्टॉक 8 फीसदी से ज्यादा टूट गया है। दरअसल, यस बैंक के शेयरों में यह गिरावट बैंक के उस बयान के बाद आई है जिसमें साफ किया गया है कि सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉरपोरेशन (SMBC) द्वारा पूर्ण &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>यस बैंक के शेयरों में तेजी के बाद फिर से बिकवाली हावी हो गई है। आज यह बैंक स्टॉक 8 फीसदी से ज्यादा टूट गया है। दरअसल, यस बैंक के शेयरों में यह गिरावट बैंक के उस बयान के बाद आई है जिसमें साफ किया गया है कि सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉरपोरेशन (SMBC) द्वारा पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी में कंट्रोलिंग स्टैक हासिल करने के लिए RBI की मंजूरी मांगने से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट “तथ्यात्मक रूप से गलत” थी।</p>
<p>बैंक का यह बयान बोर्ड के बैठक से पहले आया है जिसमें इक्विटी शेयरों, डेट सिक्योरिटी या प्राइवेट प्लेसमेंट के माध्यम से पूंजी जुटाने पर चर्चा होनी है। इससे पहले SMBC द्वारा बैंक में हिस्सेदारी खरीदने की अटकलों के चलते यस बैंक के शेयरों में लगातार तेजी देखने को मिल रही थी।</p>
<p><strong>30% तक उछल गए थे यस बैंक के शेयर</strong><br />
यस बैंक के शेयर आज तगड़ी गिरावट के साथ 21.31 रुपये पर कारोबार कर रहे थे। एसएमबीसी के मुद्दे पर बैंक की ओर से आई सफाई के कारण इस बैंक शेयर ने 2 जून को मिली सारी बढ़त गंवा दी।</p>
<p>कल यस बैंक के शेयर 21.40 रुपये पर ओपन हुए थे और 23.39 रुपये का हाई लगाकर 23.28 रुपये के स्तर पर बंद हुए। मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, 20-21 रुपये का स्तर यस बैंक के शेयरों के लिए एक अहम सपोर्ट है। पिछले एक महीने में यस बैंक के शेयर 30 फीसदी से ज्यादा चढ़ गए थे।</p>
<p>इससे पहले मीडिया रिपोर्ट्स में यह कहा जा रहा था कि जापान की सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉरपोरेशन (SMBC) भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम से यस बैंक में 20% हिस्सेदारी हासिल करने की प्लानिंग कर रही है।</p>
<p>इस खबर से रिटेल निवेशकों के मन में यस बैंक को लेकर मजबूत धारणा बन थी। क्योंकि, इस डील के बाद SMBC यस बैंक का सबसे बड़ा शेयरधारक बन जाता।</p>
<p>(डिस्क्लेमर: यहां शेयरों को लेकर दी गई जानकारी निवेश की सलाह नहीं है। चूंकि, स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)</p>
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		<item>
		<title>RBI जल्द करेगा Repo Rate में कटौती, इतनी सस्ती हो सकती है आपके होम लोन की EMI</title>
		<link>https://kashijagran.com/rbi-%e0%a4%9c%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%97%e0%a4%be-repo-rate-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%9f%e0%a5%8c%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%87%e0%a4%a4%e0%a4%a8/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 03 Jun 2025 07:49:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
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					<description><![CDATA[आरबीआई एक साल में हर दो महीने बाद रेपो रेट रिवाइज करती है। साल 2025 में फरवरी और अप्रैल महीने में रेपो रेट में दो बार कटौती की जा चुकी है। दोनों ही बार रिजर्व बैंक ने 0.25 फीसदी की कटौती की है, जो कुल मिलाकर 0.50 फीसदी है। एसबीआई द्वारा हाल ही में जारी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[

आरबीआई एक साल में हर दो महीने बाद रेपो रेट रिवाइज करती है। साल 2025 में फरवरी और अप्रैल महीने में रेपो रेट में दो बार कटौती की जा चुकी है। दोनों ही बार रिजर्व बैंक ने 0.25 फीसदी की कटौती की है, जो कुल मिलाकर 0.50 फीसदी है।

 

एसबीआई द्वारा हाल ही में जारी की गई रिपोर्ट में ये सामने आया है कि इस बार भी रिजर्व बैंक द्वारा 0.50 फीसदी की कटौती हो सकती है। इस कटौती का इनडायरेक्ट असर लोन ब्याज और एफडी ब्याज पर पड़ता है।

 

इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि अनुमानित 0.50 फीसदी कटौती के बाद आपका ईएमआई कितना कम हो जाएगा। इसे हम कैलकुलेशन के माध्यम से समझेंगे।

 

<strong>कितना कम हो सकता है ईएमआई</strong>

 
<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img decoding="async" class="wp-image-190261" src="https://deshjagran.com/wp-content/uploads/2025/06/Screenshot-2025-06-03-125451.png" alt="" /></figure>
 

नीचे दी गई कैलकुलेशन में हमने ये माना है कि बैंक द्वारा भी ब्याज दर में 0.50 फीसदी की कटौती की गई है। हालांकि रेपो रेट में कटौती के बाद ब्याज दर कितना कम होगा, ये बैंकों पर आधारित होता है। इसके साथ ही अलग-अलग व्यक्ति का लोन इंटरेस्ट रेट अलग-अलग हो सकता है।

 

<strong>कैलकुलेशन</strong>
30 लाख रुपये लोन
सबसे पहले जानते हैं कि अगर व्यक्ति द्वारा 20 साल के लिए 30 लाख रुपये का लोन लिया जाता है, तो रेपो रेट कम होने से ईएमआई पर कितनी बचत होगी।

 

अवधि- 20 साल
अमाउंट- 30 लाख रुपये

 

20 साल के लिए 30 लाख रुपये लोन पर 7.9 ब्याज दर के हिसाब से अभी हर महीने 24,907 रुपये ईएमआई भरने होते हैं। वहीं 0.5 गिरावट के बाद ये ईएमआई 23,985 रुपये हो सकती है। इसका मतलब है कि ब्याज दर कम होने से हर महीने 922 रुपये की बचत होगी।

 

<strong>50 लाख रुपये लोन</strong>
अवधि- 20 साल

 

<strong>अमाउंट- 50 लाख रुपये</strong>
इसी तरह अगर 7.9 फीसदी के हिसाब से 20 साल के लिए 50 लाख रुपये तक का लोन लिया जाए, तो हर महीने 41,511 रुपये ईएमआई के रूप में देने होते हैं। अगर ये ब्याज दर 7.4 फीसदी हो जाता है, तो ये ईएमआई ₹39,974 रुपये हो जाएगा। इस तरह 1537 रुपये की बचत हो सकती है।

 

<strong>70 लाख रुपये का लोन</strong>
अवधि- 20 साल

 

अमाउंट- 70 लाख रुपये

 

ऐसी ही 7.9 ब्याज के हिसाब से 20 साल के लिए 70 लाख रुपये लोन पर ईएमआई 58,116 रुपये है। अगर ये ब्याज दर 7.4 फीसदी हो जाता है, तो ईएमआई 55,964 रुपये प्रति माह बनेगी। इस तरह से हर महीने 2152 रुपये की बचत हो जाएगी।

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		<title>GDP के बाद GST कलेक्शन में भी उछाल, जानिए मई में सरकारी खजाने में आए कितने रुपये?</title>
		<link>https://kashijagran.com/gdp-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a6-gst-%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b6%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%9b%e0%a4%be/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 02 Jun 2025 07:54:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
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					<description><![CDATA[उम्मीद से बेहतर जीडीपी डेटा आने के बाद अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर एक और राहत भरी खबर आई है। मई में ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन (GST revenue May 2025)16.4 प्रतिशत बढ़कर 2.01 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया। जीएसटी कलेक्शन में यह उछाल अप्रैल में रिकॉर्ड हायर कलेक्शन के बाद आया है, जब रेवेन्यू ने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">उम्मीद से बेहतर जीडीपी डेटा आने के बाद अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर एक और राहत भरी खबर आई है। मई में ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन (GST revenue May 2025)16.4 प्रतिशत बढ़कर 2.01 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया। जीएसटी कलेक्शन में यह उछाल अप्रैल में रिकॉर्ड हायर कलेक्शन के बाद आया है, जब रेवेन्यू ने 2.37 लाख करोड़ रुपये के ऑल टाइम हाई लेवल को छू लिया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मई में, घरेलू लेनदेन से ग्रॉस रेवेन्यू 13.7 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1.50 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि आयात से जीएसटी राजस्व 25.2 प्रतिशत बढ़कर 51,266 करोड़ रुपये रहा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>राज्यवार जीएसटी कलेक्शन के आंकड़े</strong> मई में ग्रॉस सेंट्रल जीएसटी रेवेन्यू (monthly GST collection) 35,434 करोड़ रुपये, स्टेट जीएसटी रेवेन्यू 43,902 करोड़ रुपये और इंटीग्रेटेड जीएसटी लगभग 1.09 लाख करोड़ रुपये रहा। सेस से राजस्व 12,879 करोड़ रुपये रहा। मई, 2024 में यह कलेक्शन 1,72,739 करोड़ रुपये था। इसके अलावा,नेट जीएसटी कलेक्शन लगभग 1.74 लाख करोड़ रहा, जो साल-दर-साल आधार पर 20.4 प्रतिशत की वृद्धि दिखाता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अगर राज्यवार जीएसटी कलेक्शन की बात करें तो महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे बड़े राज्यों ने कलेक्शन में 17 प्रतिशत से 25 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की है. वहीं गुजरात, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे बड़े राज्यों ने 6 प्रतिशत तक की वृद्धि दिखाई है। सबसे ज्यादा रेवेन्यू 31,530 करोड़ रुपये महाराष्ट्र से आया, जबकि तमिलनाडु से 12,230 करोड़ और कर्नाटक का योगदान 14,299 करोड़ रुपये रहा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मई 2025 के जीएसटी कलेक्शन पर पार्टनर टैक्स कनेक्ट एजवाइजरी सर्विसेज लिमिटेड के पार्टनर विवेक जालान ने कहा, &#8220;घरेलू जीएसटी रेवेन्यू में लगभग 10% की वृद्धि और आयात जीएसटी राजस्व में 73% की वृद्धि के चलते, यह बहुत स्पष्ट है कि इस महीने जीएसटी रेवेन्यू में बढ़ोतरी घरेलू खपत से ज्यादा आयात से आई है। साल की शुरुआत से अब तक के आंकड़े भी इसी तरह की प्रवृत्ति दर्शाते हैं। इस दौरान एक्सपोर्ट रिफंड बढ़ते हुए नहीं दिख रहा है, ऐसे में यह स्पष्ट हो रहा है कि आयात में वृद्धि, निर्यात वृद्धि से कहीं ज्यादा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जालान ने कहा कि जीएसटी आंकड़ों में आयात वृद्धि से आया उछाल ट्रम्प 2.0 का नतीजा हो सकता है क्योंकि कई देश भारत में अपना माल डंप कर रहे हैं, क्योंकि वे अमेरिका में कम बेच रहे हैं। ऐसे में यह आवश्यक हो सकता है कि भारत को भी निकट भविष्य में विभिन्न उत्पादों पर एंटी-डंपिंग शुल्क लगाकर जवाब देना पड़े।</p>
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